क्या आपने कभी जोश में आकर कोई नया लक्ष्य शुरू किया है? जैसे सुबह 5 बजे उठना, रोज़ जिम जाना, किताबें पढ़ना या वजन कम करना। शुरुआत के कुछ दिन सब कुछ बढ़िया चलता है, लेकिन धीरे-धीरे मोटिवेशन कम होने लगता है और फिर पुरानी दिनचर्या वापस आ जाती है।
अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो आप अकेले नहीं हैं। ज्यादातर लोग अपने लक्ष्यों में इसलिए असफल नहीं होते क्योंकि उनमें क्षमता की कमी होती है, बल्कि इसलिए क्योंकि वे मोटिवेशन पर ज़्यादा और आदतों पर कम भरोसा करते हैं।
सच्चाई यह है कि मोटिवेशन अस्थायी होता है, जबकि आदतें स्थायी बदलाव लाती हैं। आइए समझते हैं कि आखिर क्यों मोटिवेशन अक्सर फेल हो जाता है और आदतें हमेशा जीत जाती हैं।
मोटिवेशन क्यों फेल हो जाता है?
मोटिवेशन एक भावना है। यह कभी बहुत ज्यादा होती है और कभी बिल्कुल नहीं होती। जब हम कोई प्रेरणादायक वीडियो देखते हैं, किसी की सफलता की कहानी सुनते हैं या नए साल का संकल्प लेते हैं, तब मोटिवेशन अपने चरम पर होती है।
लेकिन समस्या यह है कि भावनाएं हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं।
मान लीजिए आपने तय किया कि अब से रोज़ सुबह दौड़ने जाएंगे। पहले कुछ दिन आप पूरे उत्साह के साथ उठेंगे। लेकिन एक दिन मौसम खराब होगा, दूसरे दिन नींद पूरी नहीं होगी, तीसरे दिन काम का तनाव होगा। ऐसे में मोटिवेशन धीरे-धीरे कम होने लगेगी।
यही वजह है कि केवल मोटिवेशन के भरोसे बनाई गई योजनाएं अक्सर ज्यादा समय तक नहीं चल पातीं।
मोटिवेशन पर निर्भर रहने की सबसे बड़ी समस्या
जब हम किसी काम को करने के लिए मोटिवेशन का इंतजार करते हैं, तब हम अपने लक्ष्य को अपनी भावनाओं के हवाले कर देते हैं।
सोचिए, अगर एक डॉक्टर केवल तब मरीज देखे जब उसका मन हो, या एक शिक्षक केवल तब पढ़ाए जब वह प्रेरित महसूस करे, तो क्या होगा?
सफल लोग इसलिए सफल नहीं होते क्योंकि वे हर दिन मोटिवेटेड रहते हैं। वे सफल इसलिए होते हैं क्योंकि उन्होंने ऐसी आदतें बना ली होती हैं जो उन्हें बिना ज्यादा सोच-विचार के सही काम करने में मदद करती हैं।
आदतें क्यों जीतती हैं?
आदतें आपके दिमाग का ऑटोमैटिक सिस्टम हैं। जब कोई काम आदत बन जाता है, तो उसे करने के लिए ज्यादा इच्छाशक्ति या मोटिवेशन की जरूरत नहीं पड़ती।
उदाहरण के लिए, रोज़ सुबह दांत साफ करना। क्या आप इसके लिए मोटिवेशनल वीडियो देखते हैं? शायद नहीं।
आप यह काम इसलिए करते हैं क्योंकि यह आपकी आदत बन चुकी है।
ठीक इसी तरह, अगर पढ़ाई, एक्सरसाइज, मेडिटेशन या हेल्दी खाना आपकी आदत बन जाए, तो उन्हें करने के लिए रोज़ खुद को प्रेरित करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
छोटे कदम बड़ी आदतें बनाते हैं
बहुत से लोग शुरुआत में ही बहुत बड़े लक्ष्य तय कर लेते हैं। जैसे:
- रोज़ 2 घंटे जिम जाना
- हर महीने 10 किताबें पढ़ना
- रोज़ 5 बजे उठना
- एक महीने में 10 किलो वजन कम करना
ऐसे लक्ष्य सुनने में अच्छे लगते हैं, लेकिन लंबे समय तक निभाना मुश्किल होता है।
इसके बजाय छोटे कदम उठाइए।
अगर आप पढ़ने की आदत बनाना चाहते हैं, तो शुरुआत सिर्फ 5 मिनट से कीजिए।
अगर फिटनेस पर ध्यान देना चाहते हैं, तो पहले दिन सिर्फ 10 मिनट वॉक कीजिए।
छोटे कदम आपको निरंतरता बनाए रखने में मदद करते हैं और यही निरंतरता आगे चलकर बड़ी सफलता में बदलती है।
आदत बनाने का आसान फॉर्मूला
एक अच्छी आदत बनाने के लिए आपको तीन चीजों पर ध्यान देना चाहिए:
1. आदत को आसान बनाइए
जितना आसान काम होगा, उतनी संभावना होगी कि आप उसे नियमित रूप से करेंगे।
अगर आप सुबह एक्सरसाइज करना चाहते हैं, तो रात में ही अपने कपड़े और जूते तैयार रखिए।
अगर पढ़ने की आदत बनानी है, तो किताब को ऐसी जगह रखिए जहां वह आसानी से दिखाई दे।
2. आदत को छोटा रखिए
शुरुआत में लक्ष्य पूरा करने की नहीं, आदत बनाने की सोचिए।
रोज़ 50 पुशअप करने से बेहतर है रोज़ 5 पुशअप करना, क्योंकि छोटी आदतें लंबे समय तक टिकती हैं।
3. लगातार दोहराइए
आदतें एक दिन में नहीं बनतीं। उन्हें मजबूत होने में समय लगता है।
कभी-कभी आपका मन नहीं करेगा, लेकिन वही दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि आदतें तब बनती हैं जब आप बिना मन के भी सही काम करते हैं।
पहचान बदलने वाली आदतें
अक्सर लोग कहते हैं, “मुझे किताब पढ़नी है” या “मुझे फिट होना है।”
लेकिन सफल लोग अपनी पहचान बदलते हैं।
वे कहते हैं:
- मैं एक रीडर हूं।
- मैं एक फिट व्यक्ति हूं।
- मैं अपनी हेल्थ का ध्यान रखने वाला इंसान हूं।
जब आपकी पहचान बदलती है, तब आपके कार्य भी उसी के अनुसार बदलने लगते हैं।
यही कारण है कि मजबूत आदतें केवल परिणाम नहीं बदलतीं, बल्कि आपकी सोच और व्यक्तित्व को भी बदल देती हैं।
जब मोटिवेशन खत्म हो जाए तब क्या करें?
हर किसी की जिंदगी में ऐसे दिन आते हैं जब कुछ भी करने का मन नहीं करता।
ऐसे समय में खुद को यह याद दिलाइए कि आपका लक्ष्य परफेक्शन नहीं, बल्कि निरंतरता है।
अगर आज 30 मिनट वर्कआउट नहीं कर सकते, तो 5 मिनट कर लीजिए।
अगर पूरी किताब नहीं पढ़ सकते, तो सिर्फ एक पेज पढ़ लीजिए।
छोटा कदम भी शून्य से बेहतर होता है।
यही छोटे-छोटे प्रयास समय के साथ असाधारण परिणाम देते हैं।
निष्कर्ष
मोटिवेशन एक चिंगारी की तरह है। यह शुरुआत करने में मदद कर सकती है, लेकिन लंबे समय तक सफलता बनाए रखने के लिए केवल मोटिवेशन काफी नहीं है।
दूसरी तरफ, आदतें वह इंजन हैं जो आपको लगातार आगे बढ़ाती रहती हैं, चाहे आपका मूड कैसा भी हो।
अगर आप अपने जीवन में वास्तविक बदलाव चाहते हैं, तो मोटिवेशन का इंतजार करना छोड़ दीजिए और छोटी लेकिन मजबूत आदतें बनाना शुरू कीजिए।
याद रखिए, सफल लोग हमेशा मोटिवेटेड नहीं होते, लेकिन उनकी आदतें उन्हें हर दिन सही दिशा में आगे बढ़ाती रहती हैं। और आखिर में जीत उसी की होती है जो लगातार छोटे कदम उठाता रहता है।
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